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वो लोग जिन्हें “सुशांत” की मौत पर घटियापन दिखाने का मौका मिल गया है

सुशांत सिंह राजपूत नहीं रहे. 14 जून, 2020 की दोपहर, जिसने भी ये खबर सुनी वह कुछ पल के लिए सुन्न हो गया. 34 साल के एक नौजवान, जिंदादिल और जिज्ञासु इंसान के इस तरह जाने पर किसी को यकीन नहीं हो रहा था. एकबारगी तो ऐसा लगा कि शायद कोई फेक न्यूज हो. शायद गलती से कुछ गलत लिख दिया किसी ने. लेकिन खबर पक्की निकली. सोशल मीडिया अगर दुख नापने का पैमाना होता तो सुशांत की मौत ने उसे पैमाने को तोड़ दिया था. लेकिन कुछ लोग ऐसे भी थे जो कच्ची उम्र की इस मौत पर भी घटिया बातें लिख रहे थे. वो सुशांत के लिए भद्दे शब्दों का इस्तेमाल कर रहे थे. इसी तरह का ज़हर इरफान और ऋषि कपूर की मौत के बाद भी उगला गया था.
सुशांत के लिए लोग ‘एंटी हिंदू’, ‘लव जिहादी’ जैसी बातें लिख रहे थे. और इस तरह की बेहूदी बातों के लिए इनके पास ‘तर्क’ भी थे. इनका कहना था कि सुशांत को हिंदू होने पर शर्म थी, ‘पद्मावत’ फिल्म के समर्थन में उन्होंने ‘राजपूत’ सरनेम को हटा लिया था. तो ऐसे आदमी की मौत पर क्या शोक करना.
बता दें कि ‘पद्मावत’ फिल्म को लेकर राजपूत करणी सेना ने काफी हंगामा किया था. डायरेक्टर संजय लीला भंसाली को पीटा गया था. दीपिका पादुकोण की नाक काटने की धमकी दी गई थी. सुशांत हिंसा के विरोध और अभिव्यक्ति की आजादी के पक्ष में खड़े हुए थे. जाहिर है कि कोई भी समझदार आदमी यही करता है. उन्होंने हिंसा के विरोध में सरनेम ‘राजपूत’ हटा दिया था.
बस तब से ही कुछ लोगों की सुई वहीं अटक गई है. सुशांत की मौत पर उन्हें भड़ास निकालने का मौका मिल गया. कइयों ने सुशांत की मौत की खबर को भी पद्मावत, राजपूत और हिंदू से जोड़कर लिखा.
कुछ लोगों ने तो यह तक लिखा कि सुशांत ने फिल्म पीके और केदारनाथ में लव जिहादी की भूमिका निभाई थी. ऐसे लोगों की मौत से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए.

सुशांत के लिए लोग ‘एंटी हिंदू’, ‘लव जिहादी’ जैसी बातें लिख रहे थे. और इस तरह की बेहूदी बातों के लिए इनके पास ‘तर्क’ भी थे. इनका कहना था कि सुशांत को हिंदू होने पर शर्म थी, ‘पद्मावत’ फिल्म के समर्थन में उन्होंने ‘राजपूत’ सरनेम को हटा लिया था. तो ऐसे आदमी की मौत पर क्या शोक करना.
बता दें कि ‘पद्मावत’ फिल्म को लेकर राजपूत करणी सेना ने काफी हंगामा किया था. डायरेक्टर संजय लीला भंसाली को पीटा गया था. दीपिका पादुकोण की नाक काटने की धमकी दी गई थी. सुशांत हिंसा के विरोध और अभिव्यक्ति की आजादी के पक्ष में खड़े हुए थे. जाहिर है कि कोई भी समझदार आदमी यही करता है. उन्होंने हिंसा के विरोध में सरनेम ‘राजपूत’ हटा दिया था.
बस तब से ही कुछ लोगों की सुई वहीं अटक गई है. सुशांत की मौत पर उन्हें भड़ास निकालने का मौका मिल गया. कइयों ने सुशांत की मौत की खबर को भी पद्मावत, राजपूत और हिंदू से जोड़कर लिखा.
कुछ लोगों ने तो यह तक लिखा कि सुशांत ने फिल्म पीके और केदारनाथ में लव जिहादी की भूमिका निभाई थी. ऐसे लोगों की मौत से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए.

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