वीडियो: चोर के अलावा प्रधान आरक्षक से परेशान अम्बिकापुर वासी

अम्बिकापुर

अंबिकापुर शहर के प्रतिष्ठित होटल एवलॉन इन में पुलिस और आबकारी विभाग की टीम छापामार की कार्रवाई कर अवैध शराब जब्त की थी। लेकिन पुलिस और आबकारी विभाग द्वारा की गई कार्यवाही पर सवाल उठ रहे है। आरोप है कि शराब की मात्रा बढ़ाने के लिए होटल में बाहर से शराब लाकर रखा गया था। यह पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई है।

सरगुजा जिले में कुछ ऐसे पुलिसकर्मी है जिनकी वजह से पूरा विभाग बदनाम होता है। या यूं कहें कि एक मछली पूरे तालाब को गंदा करती है। बीते कुछ दिनों से ऐसा ही कुछ पुलिस विभाग में देखने को मिल रहा है।  आए दिन कुछ ना कुछ ऐसी घटना घट रही है जिस वजह से पुलिस विभाग बदनाम हो रहा है। ऐसा ही कुछ मामला एक बार फिर सामने आया है। जहां पुलिस विभाग में पदस्थ कुछ पुलिसकर्मियों ने आबकारी विभाग की मदद से शराब माफियाओं के कहने पर शहर के एक प्रतिष्ठित होटल एवलॉन इन को बदनाम करने की साजिश रची थी। यह आरोप होटल संचालक रिंकू छाबड़ा ने लगाया। यही नहीं पुलिस, आबकारी विभाग और शराब माफियाओं की करतूत सीसीटीवी कैमरे में भी कैद हुई है। 

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चलिए अब आपको आगे बताते आखिर पूरा माजरा क्या है। दरअसल बीते कुछ दिनों पहले शहर के एक प्रतिष्ठित होटल एवलॉन इन में शराब माफियाओं के कहने पर आबकारी विभाग और कोतवाली पुलिस की टीम ने छापामार की कार्रवाई की थी। इस दौरान पुलिस और आबकारी विभाग ने मौके से 7 बोतल अंग्रेजी शराब जब किया था। इसके बाद कोतवाली पुलिस ने होटल संचालक और एक कर्मचारी के विरुद्ध आबकारी एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए पुलिस ने दोनों को जेल भेज दिया था। लेकिन होटल में हुए कार्रवाई के कुछ दिनों बाद जब एक सीसीटीवी फुटेज सामने आया तो पुलिस और आबकारी विभाग द्वारा की गई इस कार्रवाई पर सवाल उठने लगा। दरअसल सीसीटीवी फुटेज में साफ देखने को मिल रहा है कि शराब माफिया होटल से पहले शराब की खरीदी करते हैं इसके बाद मौके पर मौजूद कोतवाली थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक धीरज गुप्ता उस कर्मचारी को धरदबोचता है। इसके बाद प्रधान आरक्षक धीरज गुप्ता जप्त की गई शराब को होटल के कमरे के अंदर लेकर जाता है। वही कुछ देर बाद होटल के ठीक बाहर खड़े एक बोलेरो वाहन से एक शख्स शराब की एक बोतल लेकर होटल के अंदर प्रवेश करता है। इसके बाद वह शख्स बाहर से लाई गई शराब की बोतल को होटल के रिसेप्शन काउंटर पर रख देता है। वही दूसरे सीसीटीवी फुटेज में नज़र आ रहा है कि कुछ देर बाद एक पुलिसकर्मी उसी शराब की बोतल को उस कमरे के पास लेकर जाता है जहां पुलिस पूरी कार्रवाई को अंजाम दे रही है। वही मौके पर मौजूद प्रधान आरक्षक धीरज गुप्ता बाहर से लाई गई शराब की बोतल को अपने हाथ में लेता है और इधर उधर देखने के बाद उस शराब की बोतल को जब्त की गई शराब में मिला देता है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर कार वह शख्स कौन था जो बाहर से शराब आपको लाकर रिसेप्शन के काउंटर पर रखता है। दरअसल पड़ताल में पता चला कि वह शख्स और कोई नहीं बल्कि होटल के बाहर खड़ी आबकारी अधिकारी के सरकारी वाहन का ड्राइवर था। वही होटल संचालक रिंकू छाबड़ा का आरोप है कि यह षड्यंत्र शराब की मात्रा को बढ़ाने और गैर जमानती धाराओं के तहत कार्रवाई करने के उद्देश्य से शराब माफिया पवन सिंह के कहने पर पुलिस और आबकारी विभाग की टीम द्वारा रची गई थी। यही नहीं होटल संचालक ने आरोप लगाया कि शराब माफिया पवन सिंह द्वारा आए दिन होटल में मिलावटी शराब बेचने को कहता था। लेकिन होटल संचालक के मना करने पर शराब माफिया ने उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाने के लिए पुलिस और आबकारी विभाग के अधिकारियों से मिलीभगत कर यह पूरा षड्यंत्र रचा था। वही होटल संचालक रिंकू छाबड़ा ने पुलिस अधिकारियों से इस मामले में निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई  करने की मांग की है। बहरहाल सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद पुलिस और आबकारी विभाग के अधिकारियों का बेनकाब चेहरा भी सामने आ गया है कि किस तरफ पुलिसकर्मी और आबकारी विभाग के अधिकारी किसी भी व्यक्ति को फसाने के लिए किस हद तक जा सकते हैं।

 

 

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